10 Class SL Hindi - Baraste Badal - 2 ( बरसते बादल - 2 )( తెలుగు వివరణతో )
रिमझिम-रिमझिम क्या कुछ कहते बूँदों के स्वर,
रोम सिहर उठते छूते वे भीतर अंतर।
धाराओं पर धाराएं झरती धरती पर,
रज के कण-कां में तृण-तृण को पुलकावलि थर।।
पकड़ वारि की धार झूलता है मेरा मन,
आओ रे सब मुझे घेर कर गाओ सावन।
इंद्रधनुष के झूले में झूलें मिल सब जन,
फिर-फिर आये जीवन में सावन मनभावन।।
शब्दार्थ - Meanings covered in these Poems
रिमझिम,कहना,बूँद,स्वर,रोम,सिहर उठना,भीतर,अंतर,
धारा,झरना,धरती,रज,कण,तृण,थर,पुलकावलि,
पकड़ना,वारि,धार,झूलना,मन,घेरना,गाना,सावन,
इंद्रधनुष,झूला,जन,फिर - फिर ,जीवन,मनभावन,
10 Class SL Hindi - Baraste Badal - 1 ( बरसते बादल - 1 )( తెలుగు వివరణతో ) AP & Telangana State Boards
उन्मुखीकरण
क्या गाती हो, किसे बुलाती,
बतला दो कोयल रानी |
प्यासी धरती देख माँगती,
हो क्या मेघों से पानी ?
प्रश्नोत्तर
ఏమి పాడుతున్నావు, ఎవరిని పిలుస్తున్నావు ,
చెప్పు కోకిల రాణి
దాహంతో ఉన్న భూమిని చూసి అడుగుతున్నావా,
మేఘాల నుండి నీటిని?
1. मीठे गीत कौन गाती है ? ( మధురమైన పాటని ఎవరు పాడుతున్నారు ? )
उ) मीठे गीत कोयल रानी गाती है| ( మధురమైన పాటని కోకిల రాణి పాడుతున్నది. )
2. प्यासी धरती पानी किस से माँगती है? (దాహంతో ఉన్న భూమి నీటిని ఇవ్వమని ఎవరిని అడుగుతుంది? )
उ) प्यासी धरती पानी मेघों से माँगती है| (దాహంతో ఉన్న భూమి నీటిని ఇవ్వమని మేఘాలను అడుగుతుంది. )
3. बादल प्रकृति की शोभा बढ़ाते हैं| कैसे ? (మేఘాలు ప్రకృతి యొక్క అందాన్ని పెంచుతాయి. ఎలా ? )
उ) आसमान में काले बादल पानी बरसकर प्रकृति के कण - कण का
रूप बदल देते हैं| ठंडी हवा आने लगती हैं| चारों ओर हरियाली
छा जाती है| इस प्रकार बादल प्रकृति की शोभा बढ़ाते हैं |
उद्देश्य
प्रकृति के प्रति काव्य रचनाओं के प्रोत्साहन के साथ-साथ सौंदर्यबोध कराना, मनोरंजनकी भावना जगाना और प्रकृति संरक्षण के लिए प्रेरित करना इसका उददेश्य है।
विधा विशेष
'बरसते बादल' कविता पाठ है। कविता भावनाओं को उदात्त बनाने के साथ-साथ सौंदर्यबोध को भी सजाती-संवारती है। प्रस्तुत कविता नाद (ध्वनि) के साथ गेय योग्य है। इसमें अनुप्रास का सुंदर प्रयोग है।
विषय प्रवेश
वर्षा ऋतु हमेशा से सबकी प्रिय ऋतु रही है| वर्षा के समय प्रकृति की सुंदरता देखने लायक होती हैं| पेड़-पौधे, पशु-पक्षी, मनुष्य और यहाँ तक कि धरती भी खुशी से झूम उठती है| इसी सौंदर्य का वर्णन यहाँ प्रस्तुत किया गया है|
कवि परिचय
प्रकृति के बेजोड़ कवि माने जाने वाले सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई सन् 1900 में अल्मोड़ा जिले,उत्तराखंड के कौसानी गाँव में हुआ| इन्हें 1960 में 'कला और बूढ़ा चाँद' केलिए 'साहित्य अकादमी', 1961 में हिंदी साहित्य सेवा केलिए 'पद्मभूषण', 1965 में 'लोकायतन' पर 'सोवियत लैंड नेहरु पुरस्कार', 1968 में 'चिदंबरा' केलिए 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' दिया गया| इनकी प्रमुख रचनाएँ - वीणा, पल्लव, ग्रंथि, गुंजन, युगांत, ग्राम्या, स्वर्णकिरण, कला और बूढ़ा चाँद, तथा चिदंबरा आदि। इनका निधन 28 दिसंबर, सन् 1977 को इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ |
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